English -Class 7 – Chapter 3 – Gopal and the Hilsa Fish – Chapter Summary

SUMMARY (English)

It was the season of the Hilsa-Fish. Everybody talked about nothing but Hilsa-Fish. Even in the royal court, people were discussing the Hilsa-Fish, which made the king lose his temper and shouted to stop the discussion. King challenged Gopal (one of his courtiers) that even he cannot stop anyone from talking about the Hilsa-Fish for even five minutes. But Gopal accepted the challenge.

Gopal went to his home and shaved his half-face, applied ash on his body, and dressed up like a rag. His wife stopped him from going out in that rags but Gopal went out to buy Hilsa-Fish. Gopal bought the Hilsa-Fish and walked toward the king’s palace. On the way, a child said that he was a joker while some said that he was a mad man, and some thought that he was a spiritual person.

When Gopal reached the court, he was not allowed to enter the palace because of his disgraceful look. He started to sing and dance loudly which caught the king’s attention. King ordered to bring the man in front of him, Gopal was recognized. King asked why he is dressed up in that hilarious fashion. Gopal said that strangely nobody seemed to be interested in the Hilsa-Fish today in the court and not even in the market. King started laughing and also congratulated Gopal on achieving the impossible task.

SUMMARY (Hindi)

यह हिल्सा-मछली का मौसम था। हर कोई हमेशा हिल्सा-मछली की ही बातें करता था। शाही दरबार में भी लोग हिल्सा-मछली की चर्चा कर रहे थे, जिससे राजा अपना आपा खो बैठा और चर्चा को रोकने के लिए चिल्लाने लगा। राजा ने गोपाल (उनके दरबारियों में से एक) को चुनौती दी कि वह भी किसी को हिल्सा-मछली के बारे में बात करने से पांच मिनट भी नहीं रोक सकता। लेकिन गोपाल ने चुनौती स्वीकार कर ली।

गोपाल अपने घर गया और अपना आधा चेहरा मुंडवा लिया, अपने शरीर पर राख लगा दी, और चिथड़े की तरह कपड़े पहने। उसकी पत्नी ने उसे उस चिथड़े में बाहर जाने से रोका लेकिन गोपाल हिल्सा-मछली खरीदने निकला। गोपाल ने हिल्सा-मछली खरीदी और राजा के महल की ओर चल दिया। रास्ते में एक बच्चे ने कहा कि वह एक जोकर है, जबकि कुछ ने कहा कि वह पागल आदमी है, और कुछ ने सोचा कि वह एक आध्यात्मिक व्यक्ति था।

गोपाल जब दरबार में पहुँचा तो उसे उसके घिनौने रूप के कारण महल में प्रवेश नहीं करने दिया गया। वह जोर-जोर से गाने और नाचने लगा जिसने राजा का ध्यान खींचा। राजा ने उस आदमी को अपने सामने लाने का आदेश दिया, गोपाल को पहचान लिया गया। राजा ने पूछा कि वह इस प्रफुल्लित करने वाले फैशन में क्यों तैयार है। गोपाल ने कहा कि अजीब बात है कि आज दरबार में हिल्सा-मछली में किसी की दिलचस्पी नहीं दिख रही थी और बाजार में भी नहीं। राजा हंसने लगा और असंभव कार्य को प्राप्त करने के लिए गोपाल को बधाई भी दी।

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