Sanskrit Class 6 Chapter 7- बकस्य प्रतीकार: -Hindi & English Translation

CBSE Ruchira भाग 1 – Sanskrit Class 6 Chapter 7- बकस्य प्रतीकार: – translation in Hindi (Hindi Anuvad) & English Translation are provided here. Also, word meanings (शब्दार्थ:), अन्वयः, सरलार्थ are given for the perfect explanation.

Translation in Hindi & English (Anuvad)

सप्तमः पाठः
बकस्य प्रतीकार:

एकस्मिन् वने शृगाल: बक: च निवसत: स्म। तयोः मित्रता आसीत्। एकदा प्रातः शृगाल: बकम् अवदत्- “मित्र! श्व: त्वं मया सह भोजनं कुरु।” शृगालस्य निमन्त्रणेन बकः प्रसन्न: अभवत्।

सरलार्थ: एक वन (जंगल) में एक सियार (गीदड़) और एक बगुला रहता था उनकी दोस्ती थी एक बार सुबह, सियार ने बगुले को कहा -“मित्र! तुम कल मेरे साथ भोजन करो सियार के (इस) निमन्त्रण से बगुला खुश हुआ

English Translation: A jackal and a heron lived in a forest. They were close friends. Once in the morning, the jackal said to the heron – “Friend! You dine with me tomorrow. Heron was happy with the invitation of the jackal.


अग्रिमे दिने स: भोजनाय शृगालस्य निवासम् अगच्छत्। कुटिलस्वभाव: शृगालः स्थाल्यां बकाय क्षीरोदनम् अयच्छत्। बकम् अवदत् च-“मित्र! अस्मिन् पात्रे आवाम् अधुना सहैव खादाव:।”

सरलार्थ: अगले दिन वह भोजन के लिए सियार के घर गया। कपटी (दुष्ट/हरामी) स्वभाव के सियार ने बगुले के लिए थाली में खीर दी और बगुले को कहा- “मित्र! इस बर्तन में हम दोनों अब साथ ही खाते हैं।

English Translation: The next day he went to the jackal’s house for food. The jackal of evil nature served rice pudding on a plate for heron and said to the heron, “Friend! On this plate, we both eat together now.

भोजनकाले बकस्य चञ्चुः स्थालीत: भोजनग्रहणे समर्था न अभवत्। अत: बक: केवलं क्षीरोदनम् अपश्यत् । शृगाल: तु सर्व क्षीरोदनम् अभक्षयत् ।

सरलार्थ: भोजन करते समय बगुले की चोंच थाली से भोजन ग्रहण करने में समर्थ नहीं हुई इसलिए बगुला केवल खीर को देखता रह गया, (परन्तु) सारी खीर तो सियार खा गया।

English Translation: While eating, the beak of the heron was not able to take food from the plate. So, the heron kept looking at the kheer (rice pudding) only, the whole kheer ate the jackal.

शृगालेन वञ्चित: बकः अचिन्तयत्-” यथा अनेन मया सह व्यवहार: कृत: तथा अहम् अपि तेन सह व्यवहरिष्यामि”। एवं चिन्तयित्वा सः शृगालम् अवदत् “मित्र! त्वम् अपि श्व: सायं मया सह भोजनं करिष्यसि”। बकस्य’ निमन्त्रणेन शृगालः प्रसन्न: अभवत्।

सरलार्थ: सियार के द्वारा ठगा हुआ बगुला सोचा -“जैसा इसके द्वारा मेरे साथ व्यवहार किया गया है, मैं भी उसके साथ वैसा ही व्यवहार करूँगा। ऐसा सोचकर वह सियार को बोला -“मित्र! तुम भी कल शाम को मेरे साथ भोजन करोगे? बगुले के (इस) निमन्त्रण से सियार खुश हुआ।

English Translation: The cheated wretch by the jackal thought – “As I have been treated by him, I will also treat him like that. Thinking that he said to the jackal -” Friend! Will you also have dinner with me tomorrow evening? Jackal was pleased with the invitation of heron.

यदा शृगाल: सायं बकस्य निवासं भोजनाय अगच्छत्, तदा बक: सङ्कीर्णमुखे कलशे क्षीरोदनम् अयच्छत्, शृगालं च अवदत्-” मित्र! आवाम् अस्मिन् पात्रे सहैव भोजनं कुर्व:” बक: कलशात् चञ्च्चा क्षीरोदनम् अखादत्। परन्तु शृगालस्य मुखं कलशे न प्राविशत्।

सरलार्थ: शाम को जब सियार बगुले के घर भोजन के लिए गया, तब बगुले ने पतले मुँह वाले कलश (बर्तन) में खीर दिया और सियार को कहा- “मित्र! हम दोनों इस पात्र में साथ ही भोजन करते हैं। बगुला कलश से चोंच के द्वारा खीर को खाया परन्तु सियार का मुँह कलश में प्रवेश नहीं किया।

English Translation: In the evening when the jackal went to heron’s house for the meal, then the heron put the kheer (rice pudding) in the thin-faced pitcher (a utensil) and said to the jackal- “Friend! We both eat together in this pitcher. Heron ate rice pudding from the pitcher with his beak. But the jackal’s mouth did not enter into the pitcher.

अत: बकः सर्वं क्षीरोदनम् अखादत्। शृगालः च केवलम् ईर्ष्षया अपश्यत् । शृगाल: बकं प्रति यादृशं व्यवहारम् अकरोत् बक: अपि शृगालं प्रति तादृशं व्यवहारं कृत्वा प्रतीकारम् अकरोत्।उक्तमपि-

सरलार्थ: इस कारण से बगुला ने सारी खीर खायी और सियार सिर्फ ईर्ष्या से देखता रहा। सियार, बगुला के प्रति जैसा व्यवहार किया, बगुला भी सियार के प्रति वैसा (ही) व्यवहार करके बदला ले लिया।
कहा भी गया है-

English Translation: For this reason, the heron ate all the pudding and the jackal kept watching only with envy. As the jackal behaved towards the heron, the heron also took revenge by behaving the same against the jackal.

आत्मदुर्व्यवहारस्य फलं भवति दु:खदम्।
तस्मात् सद्व्यवहर्तव्यं मानवेन सुखैषिणा ॥

सरलार्थ: अपने द्वारा किए गए दुर्व्यवहार का फल दुःख देने वाला होता है इस कारण से सुख चाहने वाले मनुष्य/इंसान को (दूसरों के साथ) अच्छा व्यवहार करना चाहिए।

English Translation: The misbehavior caused by oneself is painful. For this reason, a person who wants happiness should also treat others well.

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24 Comments

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