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Sanskrit class 8 chapter 10 – अशोकवनिका

Sanskrit class 8 chapter 10-अशोकवनिका – यह पाठ रामायण के सुंदरकांड के पंद्रहवें सर्ग से लिया गया है |
जैसा कि हम सभी जानते हैं रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि हैं |  तो चलिए इस Sanskrit class 8 chapter 10-अशोकवनिका पाठ में क्या लिखा है इस पाठ को पढ़ लेते हैं|

This lesson is taken from the fifteenth Sarag of the Sundara Kand of Ramayana.
As we all know, the creator of the Ramayana is Maharshi Valmiki. 
So let’s read this lesson in what is written in this lesson.

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Sanskrit class 8 chapter 10-अशोकवनिका – Chapter summary                     Hindi Translation 

इस पाठ का सार कुछ इस प्रकार है-

जैसा कि हम सभी जानते हैं ,रामायण में रावण के द्वारा सीता के हरे जाने के बाद ,हनुमान जी सीता की खोज के लिए लंका जाते हैं|
लंका में जाने के बाद वह रावण के अशोक वाटिका में पहुंचते हैं | यह वाटिका बहुत ही सुंदर था | यहां पर ही उन्हें सीता माता से भेंट होती है | इस पाठ में अशोक वाटिका के सुंदरता का वर्णन किया गया है | अशोक वाटिका जैसा दूसरा कोई वाटिका नहीं था | यहां विभिन्न रंगों के फूलों से यह वाटिका सुगंधित था | यहां लगाएं तथा विभिन्न वृक्ष इस वाटिका को अति सुंदर बनाती थी | इस वाटिका में सभी ऋतुओ में फलने तथा फूलने वाली वृक्ष थी | इसलिए यह वाटिका प्रातः काल में देखने लायक थी |
अशोक वाटिका में अनेक प्रकार के फूल खिले हुए थे, जैसे कि कनेर के फूल तथा पलाश के फूल | इन फूलों से वह स्थान काफी सुशोभित सा लग रहा था |

उस वाटिका में मोटी जड़ों वाले श्वेत कमल तथा चंपा और उद्दालक के अनेक वृक्ष लगे हुए थे | जो उस वाटिका को शोभनीय बना रहे थे |

यह अशोक वाटिका सभी वाटिकाओं में श्रेष्ठ था | यह वाटिका देवताओं के वाटिका नंदनकानन तथा कुबेर के वाटिका चैत्र रथ के समान अतुलनीय दिव्य तथा शोभनीय लग रहा था |

यह वाटिका विभिन्न आवाजों वाले पशुओं तथा पक्षियों से भरा हुआ था | तथा यहां सभी मौसम में फूलने वाले फूल शहद जैसे गंध विखेर रहे थे |

इस वाटिका में कुछ ऐसे पर्वत थे, जो पर्वतों में श्रेष्ठ पर्वत के राजा गंधमादन के समान थे | इन पर्वतों पर फूलों के कारण पूरा वाटिका सुगंधित हो रहा था |

सारी वाटिका घूमने के बाद अंत में हनुमान जी को थोड़ी दूर पर स्थित एक गोलाकार मंदिर दिखाई देता है | जहां पर सीता माता को रावण ने कैद करके रखा था | फिर सीता माता से हनुमान जी की वार्ता होती है और इस प्रकार यह पाठ समाप्त हो जाता है | आगे की कहानी के लिए आप रामायण देख सकते हैं |

Sanskrit class 8 chapter 10-अशोकवनिका –Chapter Summary                          English Translation

The essence of this lesson is as follows-

As we all know, after the departure of Sita by Ravana in the Ramayana, Hanuman ji is lynched for the discovery of Sita.
After going to Lanka, he reaches Ravana’s Ashok Bhatika. This Vatika was very beautiful. Here only they meet Sita mother. This text describes the beauty of Ashok Vatika. There was no other way like Ashok Bhatika. This Vatika was flavored with flowers of various colors here. Place here and various trees make this garden beautiful. In this garden, there was a tree growing and flowering in all the seasons. That is why this Vatika was worth seeing in the morning.
Several types of flowers were blossomed in Ashok Vatika, like flowers of Kannar and flowers of Palash. The place seemed to be quite graceful with these flowers.

In that Vatika, white lotus with thick roots and many trees of Champa and Udalak were engaged. Who was making that fountain adorable?

This Ashoka Vatika was the best in all the gardens. The Vatika seemed to be the incomparable divine and fame like the Vatika Nandankanan of the Gods and the Vatika Chaitra chariot of Kuber.

This garden was full of various voices and birds. And the flowers that flowering in all the seasons was scattered like honey.

There were some such mountains in this Vatika, which were similar to Gandhamadan in the mountains of the highest mountain. Due to the flowers on these hills, the entire Vatika was flavored.

After walking around the whole wick, finally, a globular temple is visible to Hanuman ji. Where Rita was kept captive by Sita Mata. Then Hanumanji talks to Sita Mata and thus the text ends. For the next story you can see Ramayana.

 

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