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Class 10 Sanskrit Chapter 1- शुचिपर्यावरणम्- Hindi Translation & English Translation

Last Updated on 20/08/2026 by MakeToss

शेमुषी भाग 2 –Class 10 Sanskrit Chapter 1- शुचिपर्यावरणम्– translation in Hindi हिंदी अनुवाद, Hindi meaning, Hindi arth, Hindi summary, English Translation, and English Summary, word meanings (शब्दार्थ:), अन्वयः, सरलार्थ, are given for the perfect explanation.

Translation in Hindi & English (Meaning/Arth/Anuvad)

प्रथम: पाठ:
Chapter 1 – शुचिपर्यावरणम्

स्वच्छ
पर्यावरण
Clean environment

अयं पाठः आधुनिकसंस्कृतकवेः हरिदत्तशर्मण: “लसल्लतिका” इति रचनासङ्ग्रहात् सङ्कलितोऽस्ति। अत्र कविः महानगराणां यन्त्राधिक्येन प्रवर्धितप्रदूषणोपरि चिन्तितमना: दृश्यते। स: कथयति यद् इदं लौहचक्रं शरीरस्य मनसश्च शोषकम् अस्ति। अस्मादेव वायुमण्डलं मलिनं भवति। कविः महानगरीयजीवनात् सुदूरं नदी-निर्झरं वृक्षसमूहं लताकुञ्जं पक्षिकुलकलरवकूजितं वनप्रदेशं प्रति गमनाय अभिलषति।

प्रस्तुत पाठ आधुनिक संस्कृत कवि हरिदत्त शर्मा के रचना संग्रह ‘लसल्लतिका’ से संकलित है। इसमें कवि ने महानगरों की यांत्रिक बहुलता से बढ़ते प्रदूषण पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह लौहचक्र तन-मन का शोषक है, जिससे वायुमण्डल और भूमण्डल दोनों मलिन हो रहे हैं। कवि महानगरीय जीवन से दूर, नदी-निर्झर, वृक्ष समूह, लताकुञ्ज एवं पक्षियों से गुञ्जित वनप्रदेशों की ओर चलने की अभिलाषा व्यक्त करता है।

English Translation: The text presented is compiled from the poetic collection ‘Lasallatika’ written by the modern Sanskrit poet Haridutt Sharma. In this, the poet expressed concern over the increasing pollution caused by the mechanical multiplicity of metros and said that this iron wheel is an exploiter of the body and mind, which is polluting both the atmosphere and the ground. The poet expresses the desire to walk away from the metropolitan life, towards the forested regions, surrounded by river fountains, tree clusters, creeper greeneries, and birds.

  • अयं = यह
  • पाठः = पाठ
  • आधुनिकसंस्कृतकवेः = आधुनिक संस्कृत कवि (षष्ठी विभक्ति – के)
  • हरिदत्तशर्मण: = हरिदत्त शर्मा के
  • “लसल्लतिका” = “लसल्लतिका”
  • इति = नामक / इस
  • रचनासङ्ग्रहात् = रचना-संग्रह से (पंचमी विभक्ति)
  • सङ्कलितोऽस्ति (सङ्कलितः + अस्ति) = संकलित है (लिया गया है)।
  • अत्र = यहाँ (इस पाठ में)
  • कविः = कवि
  • महानगराणां = महानगरों के (षष्ठी विभक्ति)
  • यन्त्राधिक्येन = मशीनों की अधिकता के कारण (तृतीय विभक्ति)
  • प्रवर्धितप्रदूषणोपरि (प्रवर्धित + प्रदूषण + उपरि) = बढ़े हुए प्रदूषण के ऊपर / विषय में
  • चिन्तितमना: = चिंतित मन वाले (परेशान)
  • दृश्यते = दिखाई देते हैं।
  • स: = वे (वह)
  • कथयति = कहते हैं
  • यद् (यत्) = कि
  • इदं = यह
  • लौहचक्रं = लोहे का पहिया (गाड़ियाँ और मशीनें)
  • शरीरस्य = शरीर का (षष्ठी विभक्ति)
  • मनसश्च (मनसः + च) = और मन का
  • शोषकम् = सुखाने वाला (शोषक)
  • अस्ति = है।
  • अस्मादेव (अस्मात् + एव) = इससे ही
  • वायुमण्डलं = पर्यावरण / वायुमंडल
  • मलिनं = गंदा (प्रदूषित)
  • भवति = होता है।
  • कविः = कवि
  • महानगरीयजीवनात् = महानगरीय जीवन से (पंचमी विभक्ति)
  • सुदूरं = बहुत दूर
  • नदी-निर्झरं = नदी और झरनों से युक्त
  • वृक्षसमूहं = वृक्षों के समूह (बाग) वाले
  • लताकुञ्जं = लताओं के कूंज (झाड़ियों/बेलों) वाले
  • पक्षिकुलकलरवकूजितं = पक्षियों के समूह की चहचहाहट से गूँजते हुए
  • वनप्रदेशं = वन के इलाके (जंगल)
  • प्रति = की ओर
  • गमनाय = जाने के लिए (चतुर्थी विभक्ति)
  • अभिलषति = इच्छा करते हैं (चाहते हैं)।

दुर्वहमत्र जीवितं जातं प्रकृतिरेव शरणम्।
शुचि-पर्यावरणम् ॥
महानगरमध्ये चलदनिशं कालायसचक्रम्।
मन: शोषयत् तनुः पेषयद् भ्रमति सदा वक्रम् ॥
दुर्दान्तैर्दशनैरमुना स्यान्नैव
जनग्रसनम्। शुचि…॥1॥

अन्वयः -अत्र जीवितम् दुर्वहम् जातं प्रकृति: एव शरणम्। शुचि पर्यावरणम् (भवेत्)। महानगरमध्ये अनिशं चलत् कालायसचक्रम् मनः शोषयत् तनुः पेषयद् सदा वक्रम् भ्रमति अमुना दुर्दान्तै: दशनै: जनग्रसनम् न एव स्यात्।

सरलार्थ: – यहाँ जिंदगी मुश्किल हो गया है, प्रकृति ही शरण है। पर्यावरण शुद्ध हो। महानगरों में निरंतर चलता हुआ लोहे का चक्का मन को सुखाता हुआ, शरीर को पीसता हुआ हमेशा टेढ़ा घूमता है। इन भयानक दाँतों से मानव का विनाश नहीं हो।

English Translation: Life has become difficult here, and nature is only a shelter. The environment should be free of impurities. A continuously running iron wheel in the city always dries the mind, grinds the body, and runs in a circular manner. Humans should not be annihilated (destroyed) by these heinous teeth.

  • दुर्वहम् = कठिन / दूभर / भारी
  • अत्र (दुर्वहम् + अत्र) = यहाँ (इस संसार/महानगर में)
  • जीवितं = जीना / जीवन
  • जातं = हो गया है
  • प्रकृतिरेव (प्रकृतिः + एव) = प्रकृति ही (कुदरत ही)
  • शरणम् = सहारा / आश्रय
  • शुचि = शुद्ध / पवित्र
  • पर्यावरणम् = पर्यावरण।
  • महानगरमध्ये = महानगरों के बीच में / बड़े शहरों में
  • चलदनिशं (चलत् + अनिशम्) = दिन-रात चलता हुआ (अनिशम् = दिन-रात)
  • कालायसचक्रम् (काल + आयस + चक्रम्) = लोहे का पहिया (मशीनें और गाड़ियां)।
  • मन: = मन को
  • शोषयत् = सुखाता हुआ
  • तनुः = शरीर को
  • पेषयद् (पेषयत्) = पीसता हुआ
  • भ्रमति = घूमता है
  • सदा = हमेशा
  • वक्रम् = टेढ़ा।
  • दुर्दान्तैः = भयानक / क्रूर
  • दशनैः (दुर्दान्तैः + दशनैः) = दांतों से / दांतों के द्वारा
  • अमुना (दशनैः + अमुना) = इसके द्वारा (इस लोहे के पहिये के द्वारा)
  • स्यान्नैव (स्यात् + न + एव) = नहीं होना चाहिए (स्यात् = हो, न = नहीं, एव = ही)
  • जनग्रसनम् = मानव विनाश / इंसानों को निगलना।
  • शुचि अतः पर्यावरण का शुद्ध (शुचि) होना अत्यंत आवश्यक है।

कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति शतशकटीयानम्।
वाष्पयानमाला संधावति वितरन्ती ध्वानम्॥
यानानां पङ्क्तयो ह्यनन्ताः कठिनं संसरणम्। शुचि… ॥2।॥

अन्वयः – शतशकटीयानम् कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति। ध्वानम् वितरन्ती वाष्पयानमाला संधावति। हि यानानां अनन्ता: पङ्क्तयः संसरणं कठिनम्।

सरलार्थ: – सैकड़ों मोटरगाड़ियाँ काजल-के जैसा काला (गंदा) धुआँ छोड़ती हैं शोर मचाते हुए रेलगाड़ी की पंक्ति दौड़ती है निश्चित रुप से वाहनों की असीमित पक्तियों में चलना मुश्किल है।

English Translation: Hundreds of motorcycles emitted black smoke, similar to mascara. The train makes a lot of noise. Of course, walking in endless lines of vehicles is difficult.

  • कज्जलमलिनं = काजल के समान काला / मैला
  • धूमं = धुआँ
  • मुञ्चति = छोड़ती है / उगलती है
  • शतशकटीयानम् (शत + शकटीयानम्) = सैकड़ों मोटर-गाड़ियाँ (शत = सौ, शकटीयानम् = गाड़ियाँ)।
  • वाष्पयानमाला = रेलगाड़ियों की कतार / पंक्तियाँ (वाष्पयान = रेलगाड़ी, माला = कतार)
  • संधावति = तेजी से दौड़ती है
  • वितरन्ती = बिखेरती हुई / करती हुई
  • ध्वानम् = तेज आवाज / कोलाहल (शोर)।
  • यानानां = वाहनों की / गाड़ियों की (षष्ठी विभक्ति)
  • पङ्क्तयो = कतारें / लाइनें
  • ह्यनन्ताः (ही + अनन्ताः) = निश्चित ही अनंत हैं (ही = निश्चित ही, अनन्ताः = जिनका कोई अंत न हो)
  • कठिनं = बहुत मुश्किल / दुभर
  • संसरणम् = चलना / रास्ता पार करना (पैदल चलना)।
  • शुचि… – अतः पर्यावरण का शुद्ध (शुचि) होना अत्यंत आवश्यक है।

वायुमण्डलं भृशं दूषितं न हि निर्मलं जलम्।
कुत्सितवस्तुमिश्रितं भक्ष्यं समलं धरातलम्॥
करणीयं बहिरन्तर्जगति तु बहु शुद्धीकरणम्। शुचि… ।3॥

अन्वयः -हि भृशं दूषितं वायुमण्डलं निर्मलं जलं न, कुत्सितवस्तुमिश्रितं भक्ष्यं समलं तु धरातलम् बहिः करणीयम्, जगति अन्तः बहु शुद्धिकरणम्।

सरलार्थ: – निश्चय ही हद से ज्यादा दूषित वायुमण्डल (है), शुद्ध पानी नहीं है, बीमार करने वाली चीजों से मिला हुआ भोजन है (इस) गंदगी को तो धरती से बाहर करना चाहिए और जगत के अंदर बहुत सफाई करनी चाहिए।

English Translation: Certainly, there is a highly contaminated atmosphere, no pure water, and food that has been tainted can make a person sick. This dirt should be removed from the earth, and a lot of cleaning should be done on the inside of the world.

  • वायुमण्डलं = वायुमंडल / हमारा पर्यावरण
  • भृशं = अत्यधिक / बहुत ज्यादा
  • दूषितं = गंदा / प्रदूषित हो गया है
  • = नहीं
  • ही (हि) = निश्चित रूप से / वास्तव में
  • निर्मलं = साफ़ / स्वच्छ
  • जलम् = पानी।
  • कुत्सितवस्तुमिश्रितं (कुत्सित + वस्तु + मिश्रितम्) = बुरी (हानिकारक/मिलावटी) चीजों से मिला हुआ
  • भक्ष्यं = खाने योग्य वस्तुएं / भोज्य पदार्थ
  • समलं (स + मलम्) = गंदगी से युक्त / मैला
  • धरातलम् = पृथ्वी की सतह / धरती।
  • करणीयं = करना चाहिए
  • बहिरन्तर्जगति (बहिः + अन्तः + जगति) = बाहरी और भीतरी संसार में (बहिः = बाहर, अन्तः = अंदर, जगति = संसार में)
  • तु = तो / अवश्य ही
  • बहु = बहुत अधिक / बड़े पैमाने पर
  • शुद्धीकरणम् = साफ़-सफाई / शुद्धिकरण
  • शुचि …= शुद्ध / पवित्र (पर्यावरण)।

कञ्चित् कालं नय मामस्मान्नगराद् बहुदूरम्।
प्रपश्यामि ग्रामान्ते निर्झर-नदी-पयःपूरम्॥
एकान्ते कान्तारे क्षणमपि मे स्यात् सञ्चरणम्। शुचि…॥14॥

अन्वयःकञ्चित् कालं अस्मात् नगरात् बहुदूरम् माम् नय। ग्रामान्ते निर्झर-नदी-पय:पूरम् प्रपश्यामि। एकान्ते कान्तारे क्षणम् अपि मे सञ्चरणम् स्यात्।

सरलार्थ: – कुछ समय के लिए (ही) इस नगर से बहुत दूर मुझको ले जाओ गाँव के अन्त में झरने, नदी और तालाब देखता हूँ एकान्त वन में कुछ देर के लिए भी मेरा चलना हो।

English Translation: Take me away from this city even for a short period of time. I see waterfalls, rivers, and ponds at the village’s end. I should also go for a walk in a remote forest.

  • कञ्चित् = कुछ / थोड़े
  • कालं = समय के लिए
  • नय = ले चलो
  • माम् = मुझको
  • अस्मान्नगराद् (अस्मात् + नगरात्) = इस नगर (शहर) से (अस्मात् = इस, नगरात् = नगर से)
  • बहुदूरम् = बहुत दूर।
  • प्रपश्यामि = अच्छी तरह से देखूँ (इच्छा प्रकट करना)
  • ग्रामान्ते = गाँव की सीमा पर (गाँव के अंत में)
  • निर्झर-नदी = झरने और नदी को
  • पयःपूरम् (पयः + पूरम्) = जल से भरे हुए जलाशयों / तालाबों को (पयः = पानी, पूरम् = भरा हुआ)।
  • एकान्ते = एकांत में / सुनसान (शांत) जगह पर
  • कान्तारे = जंगल में (वन में)
  • क्षणमपि (क्षणम् + अपि) = एक पल के लिए भी (अपि = भी)
  • मे = मेरा
  • स्यात् = हो सके
  • सञ्चरणम् = घूमना / टहलना (विहार करना)
  • शुचि… = शुद्ध / पवित्र (पर्यावरण)।

हरिततरूणां ललितलतानां माला रमणीया।
कुसुमावलिः समीरचालिता स्यान्मे वरणीया॥
नवमालिका रसालं मिलिता रुचिरं संगमनम्। शुचि… ॥।51॥

अन्वयः – मे हरिततरूणां ललितलतानां माला रमणीया समीरचालिता कुसुमावलिः वरणीया स्यात्। नवमालिका रसालं रूचिरं संगमनम् मिलिता।

सरलार्थ: – मेरे द्वारा हरे-भरे वृक्षों की, सुन्दर लताओं की, वायु से हिलती हुए फूलों की आनंदित माला चुनने लायक हैं (यहाँ) नई फूलों आदि की माला और आमों का मिला हुआ दिलचस्प संगम है।

English Translation: The blissful garland of flowers moving through the air is worth picking by me. There is a mixed interesting confluence of new flower garlands and mangoes.

  • हरिततरूणां (हरित + तरूणाम्) = हरे-भरे वृक्षों की (हरित = हरे, तरूणाम् = वृक्षों की)
  • ललितलतानां = सुंदर लताओं (बेलों) की
  • माला = कतार / पंक्ति
  • रमणीया = सुंदर / मनमोहक है।
  • कुसुमावलिः (कुसुम + आवलिः) = फूलों की पंक्तियाँ (कुसुम = फूल, आवलिः = कतार)
  • समीरचालिता = हवा के द्वारा हिलाई गई (समीर = हवा, चालिता = चलाई या हिलाई गई)
  • स्यान्मे (स्यात् + मे) = मेरे लिए हो (स्यात् = हो, मे = मेरे लिए)
  • वरणीया = चुनने योग्य / अपनाने योग्य (मन को भाने वाली)।
  • नवमालिका = चमेली का फूल / नई कली
  • रसालं = आम के पेड़ से
  • मिलिता = मिल गई है (लिपटी हुई है)
  • रुचिरं = बहुत सुंदर / अत्यंत आकर्षक
  • संगमनम् = मिलन (जोड़ा)
  • शुचि = शुद्ध / पवित्र (पर्यावरण)।

अयि चल बन्धो! खगकुलकलरव गुञ्जितवनदेशम्।
पुर-कलरव सम्भ्रमितजनेभ्यो धृतसुखसन्देशम्॥
चाकचिक्यजालं नो कुर्याज्जीवितरसहरणम्। शुचि… 16॥

अन्वयः- अयि बन्धो! खगकुलकलरव गुञ्जितवनदेशम् चल। पुर-कलरव सम्भ्रमितजनेभ्यो धृतसुखसन्देशम् चाकचिक्यजाल जीवितरससहरणम् नो कुर्यात्।

सरलार्थ: – अरे भाई! चिड़ियों के समूह की कलरव/चहचहाहट से गुञ्जित वन के देश में चलो शहर के शोर/हल्ला से भ्रमित लोगों के लिए सुख संदेश को धारण करो चकाचौंध वाली संसार को जीवन के रस की चोरी नहीं करनी चाहिए।

English Translation: Walk in the country of forest resonated with the tweet of birds. Give the message of happiness to the confused people by the noise of the city. The dazzling world should not steal life’s juice.

  • अयि = अरे / हे
  • चल = चलो
  • बन्धो! = भाई! / मित्र!
  • खगकुलकलरव (खग + कुल + कलरव) = पक्षियों के समूह की चहचहाहट से (खग = पक्षी, कुल = समूह, कलरव = मधुर आवाज)
  • गुञ्जितवनदेशम् (गुञ्जित + वन + देशम्) = गूंजते हुए वन प्रदेश (जंगल) की ओर।
  • पुर-कलरव = नगर (शहर) के कोलाहल या शोर-शराबे से (पुर = नगर)
  • सम्भ्रमितजनेभ्यो (सम्भ्रमित + जनेभ्यः) = परेशान या भ्रमित लोगों के लिए
  • धृतसुखसन्देशम् (धृत + सुख + सन्देशम्) = सुख का संदेश धारण कराने वाले / तसल्ली देने वाले।
  • चाकचिक्यजालं = चकाचौंध से भरी हुई दुनिया (महानगरों की कृत्रिम चमक-दमक)
  • नो (न + उ) = कहीं ऐसा न हो कि / नहीं
  • कुर्याज्जीवितरसहरणम् (कुर्यात् + जीवित + रस + हरणम्) = जीवन के आनंद का हरण कर ले (कुर्यात् = करे, जीवितरस = जीवन का आनंद/रस, हरणम् = चुराना या नष्ट करना)
  • शुचि = शुद्ध / पवित्र (पर्यावरण)।

प्रस्तरतले लतातरुगुल्मा नो भवन्तु पिष्टा:।
पाषाणी सभ्यता निसर्गे स्यान्न समाविष्टा ॥
मानवाय जीवनं कामये नो जीवन्मरणम्। शुचि… ॥ 7॥

अन्वयःलतातरुगुल्मा: प्रस्तरतले पिष्टा: नो भवन्तु। निसर्गे पाषाणी सभ्यता समाविष्टा न स्यात्। मानवाय जीवन कामये जीवन् मरणम्।

सरलार्थ: -लता, पेड़ तथा झाड़ी पत्थरों के तल (निचला भाग) में न पिसें प्रकृति में पत्थरों वाली सभ्यता अन्तर्भूत न हों मनुष्यों के लिए जिदंगी की कामना करता हूँ, जीते हुए मरण की नहीं।

English Translation: The vine, tree, and shrub should not be crushed under the stone. The civilization of stones should not be intrinsic in nature. I wish for life for humans, not a living death.

  • प्रस्तरतले (प्रस्तर + तले) = पत्थरों के नीचे / पथरीली सतह पर (प्रस्तर = पत्थर, तले = नीचे/तल पर)
  • लतातरुगुल्मा (लता + तरु + गुल्माः) = लताएँ, वृक्ष और झाड़ियाँ (तरु = पेड़, गुल्म = झाड़ी)
  • नो = नहीं
  • भवन्तु = हों / बनें
  • पिष्टा: = पिसे हुए (नष्ट)।
  • पाषाणी = पथरीली / पाषाण काल जैसी कठोर (मशीनी)
  • सभ्यता = संस्कृति / जीवनशैली
  • निसर्गे = प्रकृति में (कुदरत में)
  • स्यान्न (स्यात् + न) = न हो जाए (स्यात् = हो, न = नहीं)
  • समाविष्टा = समाहित / विलीन (हावी)।
  • मानवाय = मानव के लिए / इंसानों के लिए (चतुर्थी विभक्ति)
  • जीवनं = सुंदर और स्वस्थ जीवन की
  • कामये = कामना करता हूँ / इच्छा करता हूँ
  • नो = नहीं
  • जीवन्मरणम् (जीवन् + मरणम्) = जीते-जी मरने की (घुट-घुट कर जीने की)
  • शुचि = शुद्ध / पवित्र (पर्यावरण)।

👍👍👍

51 thoughts on “Class 10 Sanskrit Chapter 1- शुचिपर्यावरणम्- Hindi Translation & English Translation”

  1. Thanks for your such a easy translation…
    Sir please 🙏🏻 😢 🙂 upload the translation of
    remaining chapters 😌

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