Last Updated on 20/08/2026 by MakeToss
CBSE Ruchira Bhag 2- Class 7 Sanskrit Chapter 7 – सङ्कल्प: सिद्धिदायक:– translation in Hindi (Hindi Anuvad), हिंदी अनुवाद, Hindi meaning, Hindi arth, Hindi summary, English Translation, and English Summary are provided here. That Means, word meanings (शब्दार्थ:), अन्वयः, सरलार्थ, are given for the perfect explanation.
Translation in Hindi & English (Anuvad)
सप्तम: पाठः
सङ्कल्प: सिद्धिदायक:
संकल्प सिद्धि का स्रोत है
(पार्वती शिवं पतिरूपेण अवाञ्छत्। एतदर्थं सा तपस्यां कर्तुम् ऐच्छत्। सा स्वकीयं मनोरथं मात्रे न्यवेदयत्। तत् श्रुत्वा माता मेना चिन्ताकुला अभवत्।)
(पार्वती शिव को (अपने) पति के रूप में चाहती थी। इसके लिए वह तपस्या (को) करना चाहती थी। उन्होंने अपनी इच्छा को (अपनी) मां को बताया। वह सुनकर माता मेना चिंता से व्याकुल हो गईं।)
(Parvati wanted Shiva as her husband. She wanted to do penance for this. She expressed her wish to her mother. Hearing that, mother ‘Mena’ was distraught with worry.)
Word Meaning:–
- पार्वती: पार्वती (देवी पार्वती)
- शिवम्: शिव को (भगवान शिव को)
- पतिरूपेण: पति के रूप में
- अवाञ्छत्: चाहती थीं / इच्छा की
- एतदर्थम् (एतत् + अर्थम्): इसके लिए / इस कारण से
- सा: वह (पार्वती)
- तपस्याम्: तपस्या / कठिन तप
- कर्तुम्: करने के लिए
- ऐच्छत्: चाहती थीं / इच्छा की
- सा: उन्होंने (पार्वती ने)
- स्वकीयम्: अपनी / अपने मन की
- मनोरथम्: मन की इच्छा को / अभिलाषा को
- मात्रे: माता से / माता के आगे
- न्यवेदयत्: निवेदन किया / बताया
- तत्: वह (वह बात)
- श्रुत्वा: सुनकर
- माता: माता
- मेना: मेना (पार्वती जी की माता का नाम)
- चिन्ताकुला: चिंता से व्याकुल / परेशान
- अभवत्: हो गईं।
मेना – वत्से! मनीषिताः देवताः गृहे एव सन्ति। तपः कठिनं भवति। तव शरीरं
सुकोमलं वर्तते। गृहे एव वस। अत्रैव तवाभिलाषः सफलः भविष्यति।
पार्वती – अम्ब! तादृशः अभिलाषः तु तपसा एव पूर्णः भविष्यति। अन्यथा तादृशं
पति कथं प्राप्स्यामि। अहं तपः एव चरिष्यामि इति मम सङ्कल्पः।
मेना – पुत्रि! त्वमेव मे जीवनाभिलाषः।
पार्वती – सत्यम्। परं मम मनः लक्ष्यं प्राप्तुम् आकुलितं वर्तते। सिद्धिं प्राप्य पुनः
तवैव शरणम् आगमिष्यामि। अद्यैव विजयया साकं गौरीशिखरं गच्छामि।
Hindi Translation
मेना – हे पुत्री! इच्छित देवता घर में ही हैं। तप कठिन होता है। तुम्हारा शरीर अति कोमल है। घर पर ही रहो। यहीं तुम्हारी अभिलाषा सफल होगी।
पार्वती – हे माता! ऐसी अभिलाषा तो तपस्या से ही पूरी होगी। अन्यथा वैसा पति कैसे प्राप्त करुँगी। “मैं तप ही करुँगी” (ऐसा) मेरा सङ्कल्प है।
मेना – बेटी! तुम ही मेरे जीवन की अभिलाषा हो।
पार्वती – सत्य है। लेकिन मेरा मन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्याकुल है। सिद्धि को प्राप्त करके फिर तुम्हारी ही शरण आ जाऊँगी। आज ही विजया के साथ गौरीशिखर को जाती हूँ।
English Translation
Mena – O daughter! The desired deity is in the house itself. Penance is difficult. Your body is very soft. Stay at home This is where your wish will be successful.
Parvati – Oh mother! Such a desire can be fulfilled only by penance. Otherwise, how will I get such a husband? “I will do penance only” is my resolution.
Mena – daughter! You are the desire of my life.
Parvati – is the truth. But my mind is desperate to achieve the goal. After achieving success, I will come to your refuge. I am going to Gauri Shikhar today with Vijaya.
Word Meaning:–
- वत्से! = हे पुत्री! / हे बच्ची!
- मनीषिताः = इच्छित (मनचाहे)
- देवताः = देवता / भगवान
- गृहे = घर में
- एव = ही
- सन्ति = हैं।
- तपः = तपस्या
- कठिनं = कठिन / मुश्किल
- भवति = होती है।
- तव = तुम्हारा
- शरीरं = शरीर
- सुकोमलं = अत्यधिक कोमल
- वर्तते = है।
- गृहे = घर में
- एव = ही
- वस = रहो।
- अत्रैव (अत्र + एव): अत्र = यहाँ, एव = ही (यहीं पर)
- तवाभिलाषः (तव + अभिलाषः): तव = तुम्हारी, अभिलाषः = इच्छा / चाहत
- सफलः = सफल / पूरी
- भविष्यति = हो जाएगी।
- अम्ब! = हे माता!
- तादृशः = वैसी (भगवान शिव को पति रूप में पाने जैसी)
- अभिलाषः = इच्छा
- तु = तो
- तपसा = तपस्या से
- एव = ही
- पूर्णः = पूरी
- भविष्यति = होगी।
- अन्यथा = नहीं तो / इसके बिना
- तादृशं = वैसा (उनके जैसा)
- पतिम् = पति
- कथं = कैसे
- प्राप्स्यामि = प्राप्त करूँगी।
- अहं = मैं
- तपः = तपस्या
- एव = ही
- चरिष्यामि = करूँगी (आचरण करूँगी)
- इति = ऐसा
- मम = मेरा
- सङ्कल्पः = दृढ़ निश्चय / संकल्प है।
- पुत्रि! = हे बेटी!
- त्वमेव (त्वम् + एव): त्वम् = तुम, एव = ही (तुम ही)
- मे = मेरे
- जीवनाभिलाषः (जीवन + अभिलाषः): जीवन की चाहत / जीने की इच्छा (जीवन का सहारा) हो।
- सत्यम् = यह सच है।
- परं = लेकिन
- मम = मेरा
- मनः = मन
- लक्ष्यम् = लक्ष्य को (शिव प्राप्ति को)
- प्राप्तुम् = पाने के लिए
- आकुलितं = व्याकुल / बेचैन
- वर्तते = है।
- सिद्धिं = सफलता को / इच्छित फल को
- प्राप्य = पाकर
- पुनः = फिर से / दोबारा
- तवैव (तव + एव): तव = तुम्हारी, एव = ही (तुम्हारी ही)
- शरणम् = शरण में / पास
- आगमिष्यामि = आ जाऊँगी।
- अद्यैव (अद्य + एव): अद्य = आज, एव = ही (आज ही)
- विजयया = विजया के (पार्वती की सहेली के)
- साकम् = साथ
- गौरीशिखरम् = गौरीशिखर (पर्वत की चोटी) पर
- गच्छामि = जाती हूँ।
(ततः पार्वती निष्क्रामति)
(पार्वती मनसा वचसा कर्मणा च तपः एव तपति स्म। कदाचिद् रात्रौ स्थण्डिले,
कदाचिच्च शिलायां स्वपिति स्म। एकदा विजया अवदत्।)
Hindi Translation
(तत्पश्चात पार्वती चली जाती है)
(पार्वती (अपने) मन, वचन और कर्म से तपस्या कर रही थी। कभी रात को जमीन पर,
और कभी कभी चट्टान पर सो जाती थी। एक बार विजया ने कहा।)
English Translation
(After that Parvati leaves)
Parvati was doing penance with her mind, words, and deeds. Sometimes at night she used to sleep on the ground, and sometimes on the rock. Once Vijaya said.
Word Meaning:–
ततः: इसके बाद / तब
पार्वती: पार्वती
निष्क्रामति: बाहर निकल जाती हैं (मंच से चली जाती हैं
पार्वती: पार्वती
मनसा: मन से
वचसा: वचन (वाणी) से
कर्मणा: कर्म से
च: और
तपः: तपस्या
एव: ही
तपति स्म: करती थीं। (संस्कृत में ‘स्म’ लगने से क्रिया भूतकाल की हो जाती है
कदाचित्: कभी
रात्रौ: रात में
स्थण्डिले: नग्न भूमि पर / बिना कुछ बिछाए जमीन पर
कदाचिच्च (कदाचित् + च): कदाचित् = कभी, च = और (और कभी
शिलायाम्: चट्टान पर / पत्थर पर
स्वपिति स्म: सोती थीं।
एकदा: एक बार
विजया: विजया (पार्वती की सहेली
अवदत्: बोली।
विजया – सखि! तपःप्रभावात् हिंस्रपशवोऽपि तव सखायः जाताः। पञ्चाग्नि-व्रतमपि
त्वम् अतपः। पुनरपि तव अभिलाषः न पूर्णः अभवत्।
पार्वती – अयि विजये! किं न जानासि? मनस्वी कदापि धैर्यं न परित्यजति। अपि
च मनोरथानाम् अगतिः नास्ति।
विजया – त्वं वेदम् अधीतवती। यज्ञं सम्पादितवती। तप:कारणात् जगति तव प्रसिद्धिः।
‘अपर्णा’ इति नाम्ना अपि त्वं प्रथिता। पुनरपि तपसः फलं नैव दृश्यते।
पार्वती – अयि आतुरहृदये! कथं त्वं चिन्तिता।
Hindi Translation
विजया – हे सखी ! तपस्या के प्रभाव से हिंसक जानवर भी तुम्हारे मित्र बन गए हैं। पञ्चाग्नि व्रत भी तुमने किया। फिर भी तुम्हारी इच्छा पूरी नहीं हुई।
पार्वती – अरे विजया ! क्या तुम नहीं जानती? मनस्वी/समझदार व्यक्ति कभी धैर्य नहीं छोड़ता है। और इच्छाओं की विफलता भी नहीं होती है।
विजया – तुमने वेद का अध्ययन किया। (तुमने) यज्ञ संपन्न किया। तपस्या के कारण जगत में तुम्हारी प्रसिद्धि है। ‘अपर्णा’ नाम से भी तुम जानी जाती हो फिर भी तपस्या का फल नहीं दिखाई देता।
पार्वती – अरे व्याकुल मन वाली ! तुम क्यों चिंतित हो।
English Translation
Vijaya- O friend! Due to the effect of penance, even the fiercest animals have become your friends. You also did Panchagni penance. Still, your wish didn’t come true.
Parvati – Oh Vijaya! Don’t you know? A wise person never gives up patience. And there is also no failure of desires.
Vijaya – You studied the Vedas. You completed the yajna well. You are famous in the world due to your penance. You are also known by the name ‘Aparna’. Even then the fruits of penance are not visible.
Parvati – Hey distraught-minded one! Why are you worried?
Word Meaning:–
- सखि! = हे सहेली! / हे मित्र!
- तपःप्रभावात् = तपस्या के प्रभाव से
- हिंस्रपशवोऽपि (हिंस्रपशवः + अपि): हिंस्रपशवः = हिंसक पशु (जंगली जानवर), अपि = भी
- तव = तुम्हारे
- सखायः = मित्र / दोस्त
- जाताः = बन गए हैं।
- पञ्चाग्निव्रतमपि (पञ्चाग्निव्रतम् + अपि): पञ्चाग्निव्रतम् = पंचाग्नि व्रत (चारों तरफ आग जलाकर और ऊपर से सूर्य को देखते हुए तप करना), अपि = भी
- त्वम् = तुमने
- अतपः = तपा है (किया है)।
- पुनरपि (पुनः + अपि): पुनः = फिर, अपि = भी (फिर भी)
- तव = तुम्हारी
- अभिलाषः = इच्छा / कामना
- न = नहीं
- पूर्णः = पूरी
- अभवत् = हुई।
- अयि = अरे / हे
- विजये! = विजया!
- किम् = क्या
- न = नहीं
- जानासि? = जानती हो?
- मनस्वी = महापुरुष / दृढ़ इच्छाशक्ति वाले लोग
- कदापि (कदा + अपि): कदा = कभी, अपि = भी (कभी भी)
- धैर्यम् = धीरज / धैर्य को
- न = नहीं
- परित्यजति = त्यागते हैं / छोड़ते हैं।
- अपि च = और भी (इसके अलावा)
- मनोरथानाम् = मन की इच्छाओं की
- अगतीः = विफलता / गतिहीनता (रुकना)
- नास्ति (न + अस्ति): न = नहीं, अस्ति = है (नहीं होती है)।
- त्वम् = तुमने
- वेदम् = वेदों का
- अधीतवती = अध्ययन किया है / पढ़े हैं।
- यज्ञम् = यज्ञों को
- सम्पादितवती = संपन्न किया है / किया है।
- तप:कारणात् = तपस्या के कारण से
- जगति = संसार में / दुनिया में
- तव = तुम्हारी
- प्रसिद्धिः = प्रसिद्धि / ख्याति है।
- अपर्णा = अपर्णा (तपस्या के समय पत्ते भी न खाने के कारण पड़ा नाम)
- इति = इस
- नाम्ना = नाम से
- अपि = भी
- त्वम् = तुम
- प्रथिता = प्रसिद्ध हो।
- पुनरपि (पुनः + अपि): फिर भी
- तपसः = तपस्या का
- फलम् = फल / परिणाम
- नैव (न + एव): न = नहीं, एव = ही (बिल्कुल नहीं)
- दृश्यते = दिखाई देता है।
- अयि = अरे / ओ
- आतुरहृदये! = व्याकुल हृदय वाली! (जल्दी घबरा जाने वाली!)
- कथम् = क्यों
- त्वम् = तुम
- चिन्तिता = चिंतित (परेशान) हो?
(नेपथ्ये अयि भो! अहम् आश्रमवटुः। जलं वाञ्छामि।)
(ससम्भ्रमम्) विजये! पश्य कोऽपि वटुः आगतोऽस्ति।
(विजया झटिति अगच्छत्, सहसैव वटुरूपधारी शिवः तत्र प्राविशत्)
Hindi Translation
(मंच पर, अरे! मैं आश्रम का (एक) ब्रह्मचारी हूँ। जल पीना चाहता हूँ।)
(घबराहट से) विजया ! देखो, कोई ब्रह्मचारी आया है।
(विजया जल्दी से चली गई, अचानक ही (एक) ब्रह्मचारी रूप में शिव वहाँ प्रवेश करते हैं)
English Translation
(On the stage, hey! I am a celibate of the ashram. I want to drink water.)
(nervously) Vijaya! Look, a celibate has come.
(Vijaya leaves hurriedly, and suddenly Shiva enters there in a celibate form)
Word Meaning:–
नेपथ्ये: पर्दे के पीछे से (रंगमंच या स्टेज के पीछे से आने वाली आवाज़)
अयि भो!: अरे ओ! / सुनिए!
अहम्: मैं
आश्रमवटुः: आश्रम का ब्रह्मचारी (आश्रम में रहने वाला छात्र)
जलम्: जल / पानी
वाञ्छामि: चाहता हूँ / पीना चाहता हूँ।
ससम्भ्रमम्: घबराहट के साथ / अड़बड़ाहट में (हड़बड़ाकर)
विजये!: हे विजया!
पश्य: देखो
कोऽपि (कः + अपि): कः = कोई, अपि = भी (कोई)
वटुः: ब्रह्मचारी
आगतोऽस्ति (आगतः + अस्ति): आगतः = आया, अस्ति = है (आया हुआ है)।
विजया: विजया
झटिति: तुरंत / शीघ्र ही
अगच्छत्: गई
सहसैव (सहसा + एव): सहसा = अचानक, एव = ही (अचानक ही)
वटुरूपधारी: ब्रह्मचारी का रूप धारण किए हुए
शिवः: भगवान शिव
तत्र: वहाँ
प्राविशत्: प्रवेश करते हैं / आए।
विजया – वटो! स्वागतं ते। उपविशतु भवान्। इयं मे सखी पार्वती। शिवं प्राप्तुम् अत्र
तपः करोति।
वटु: – हे तपस्विनि! किं क्रियार्थं पूजोपकरणं वर्तते, स्नानार्थं जलं सुलभम्,
भोजनार्थं फलं वर्तते? त्वं तु जानासि एव शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।
(पार्वती तूष्णीं तिष्ठति)
वटु: – हे तपस्विनि! किमर्थं तपः तपसि? शिवाय?
(पार्वती पुनः तूष्णीं तिष्ठति)
विजया – (आकुलीभूय) आम्, तस्मै एव तपः तपति।
(वटुरूपधारी शिवः सहसैव उच्चैः उपहसति)
Hindi Translation
विजया- हे ब्रह्मचारी ! आप का स्वागत है। आप बैठिए। यह मेरी सखी पार्वती है। शिव को प्राप्त करने के लिए तप करती है।
ब्रह्मचारी- हे तपस्विनी ! क्या (तप) करने के लिए पूजा की सामग्री/उपकरण है? स्नान के लिए आसानी से प्राप्त जल है? भोजन के लिए फल है? तुम तो जानती ही हो (कि) शरीर सबसे पहले निश्चित रूप से धर्म का साधन है।
(पार्वती चुप रहती हैं)
ब्रह्मचारी – हे तपस्विनी! किसलिए तप कर रही हो? शिव के लिए?
(पार्वती पुनः चुप ही रहती है)
विजया – (व्याकुल होकर) हाँ, उसके लिए ही तपस्या कर रही है।
(ब्राह्मचारी रूपधारी शिव अचानक ही जोर से हंसते हैं)
English Translation
Vijaya – O celibate! You are welcome. You sit. She is my friend Parvati. She does penance to get Shiva.
Celibate – O Tapaswini/anchoress! Is there material of worship to do penance? Is there easily accessible water for bathing? Is there fruit for eating? You are well aware that the body is, first and foremost, an instrument of duty.
(Parvati remains silent)
Brahmachari/Celibate – O Tapaswini/anchoress! Why are you doing penance? For Shiva?
(Parvati is still silent.)
Vijaya – (Distraught) Yes, she is doing penance for him only.
(Shiva in the form of celibate suddenly laughs out loud)
Word Meaning:–
- वटो! = हे ब्रह्मचारी!
- स्वागतं = स्वागत है
- ते = आपका।
- उपविशतु = बैठिए
- भवान् = आप (आदरसूचक)।
- इयम् = यह
- मे = मेरी
- सखी = सहेली
- पार्वती = पार्वती है।
- शिवम् = शिव को
- प्राप्तुम् = पाने के लिए
- अत्र = यहाँ
- तपः = तपस्या
- करोति = कर रही है।
- हे = ओ / अरे
- तपस्विनि! = हे तपस्या करने वाली (पार्वती)!
- किम् = क्या
- क्रियार्थम् = दैनिक दैनिक पूजा-पाठ/धार्मिक कार्यों के लिए
- पूजोपकरणं (पूजा + उपकरणम्): पूजा की सामग्री (सामान)
- वर्तते = है?
- स्नानार्थम् = स्नान करने (नहाने) के लिए
- जलम् = पानी
- सुलभम् = आसानी से मिलने वाला (सुलभ) है?
- भोजनार्थम् = भोजन (खाने) के लिए
- फलम् = फल
- वर्तते? = है?
- त्वम् = तुम
- तु = तो
- जानासि = जानती
- एव = ही हो (कि)
- शरीरमाद्यं (शरीरम् + आद्यम्): शरीरम् = शरीर, आद्यम् = पहला / सबसे पहला
- खलु = निश्चय ही / निश्चित रूप से
- धर्मसाधनम् = धर्म को पूरा करने का माध्यम (साधन) है।
- पार्वती = पार्वती
- तूष्णीं = मौन (चुपचाप)
- तिष्ठति = रहती हैं।
- हे = ओ
- तपस्विनि! = हे तपस्विनी!
- किमर्थम् = किस लिए
- तपः = तपस्या
- तपसि? = कर रही हो (तप रही हो)?
- शिवाय? = शिव के लिए?
- पार्वती = पार्वती
- पुनः = फिर से
- तूष्णीं = मौन / चुप
- तिष्ठति = रहती हैं।
- विजया = विजया
- आकुलीभूय = व्याकुल होकर (परेशान होकर)
- आम् = हाँ,
- तस्मै = उनके (शिव के)
- एव = लिए ही
- तपः = तपस्या
- तपति = कर रही है (तप रही है)।
- वटुरूपधारी = ब्रह्मचारी का रूप धारण किए हुए
- शिवः = भगवान शिव
- सहसैव (सहसा + एव): अचानक ही
- उच्चैः = ज़ोर से / ऊँचे स्वर में
- उपहसति = उपहास करते हैं (हँसते हैं / मज़ाक उड़ाते हैं)।
वटु: – अयि पार्वति! सत्यमेव त्वं शिवं पतिम् इच्छसि? (उपहसन्) नाम्ना शिवः अन्यथा अशिवः। श्मशाने वसति। यस्य त्रीणि नेत्राणि, वसनं व्याघ्रचर्म, अङ्गरागः चिताभस्म, परिजनाश्च भूतगणाः। किं तमेव शिवं पतिम् इच्छसि?
पार्वती – (क्रुद्धा सती) अरे वाचाल! अपसर। जगति न कोऽपि शिवस्य यथार्थं स्वरूपं जानाति। यथा त्वमसि तथैव वदसि। (विजयां प्रति) सखि! चल। यः निन्दा करोति सः तु पापभाग् भवति
एव, यः शृणोति सोऽपि पापभाग् भवति।
(पार्वती द्रुतगत्या निष्क्रामति। तदैव पृष्ठतः वटोः रूपं परित्यज्य शिवः तस्याः हस्तं गृह्णाति। पार्वती लज्जया कम्पते)
शिव: – पार्वति! प्रीतोऽस्मि तव सङ्कल्पेन। अद्यप्रभृति अहं तव तपोभिः क्रीतदासोऽस्मि।
(विनतानना पार्वती विहसति)
Hindi Translation
ब्रह्मचारी – अरे पार्वती ! क्या यह सत्य है कि तुम शिव को पति रूप में चाहती हो? (हंसते हुए) (वह) नाम से शिव है वरना अशिव है। (वह) श्मशान/कब्रिस्तान में रहता है। जिसकी तीन आंखें हैं, बाघ की खाल (उसके) वस्त्र हैं, शरीर के लिए सौंदर्य प्रसाधन चिता की राख है, और (उनके) परिजन/रिश्तेदार/मित्र भूत-गण/टोली हैं। क्या तुम वही शिव को पति रूप में चाहती हो?
पार्वती – (गुस्सा होकर) अरे वाचाल/बकवादी! हट जा। दुनिया में कोई भी शिव के वास्तविक स्वरुप को नहीं जानता। जैसे तुम हो वैसे ही बोल रहे हो। (विजया से) सखी! चलो। जो (शिव की) निन्दा करता है वह तो पाप का भागी होता (ही) है। यहाँ तक कि जो सुनता है वह पाप का भागी होता है।
(पार्वती तेज गति से चली जाती है। तभी पीछे से ब्रह्मचारी रूप त्यागकर शिव उसका (पार्वती का) हाथ पकड़ लेते हैं। पार्वती लज्जा/शर्म से कांप उठती है।
शिव- पार्वती! मैं तुम्हारे संकल्प से प्रसन्न हूँ। आज से मैं तुम्हारी तपस्या के द्वारा खरीदा हुआ दास हूं।
नीचे की ओर मुंह करके पार्वती मुस्कुराती है।
English Translation
Brahmachari/Celibate – Hey Parvati! Is it true that you want Shiva as your husband? (laughs) He is Shiva by name, otherwise, he is ‘Asiva’. He lives in the crematorium. The one who has three eyes, the tiger’s skin is his clothing, the cosmetics for the body are the ashes of the pyre, and his relatives are the ghosts. Do you want the same Shiva as your husband?
Parvati – (getting angry) Hey talkative! Get out No one in the world knows the real form of Shiva. You are speaking as you are. (To Vijaya) Friend! Let us go. The one who (blasphemes Shiva) is guilty of sin, as is the one who listens.
Parvati leaves at high speed. At the same time, leaving the celibate form from behind, Shiva holds Parvati’s hand. Parvati trembles with shame.
Shiva-Parvati! I am pleased with your determination. From today I am a slave bought by your penance.
Parvati smiles while facing down.
Word Meaning:–
- अयि = अरे / ओ
- पार्वति! = पार्वती!
- सत्यमेव (सत्यम् + एव): सत्यम् = सच, एव = ही (क्या यह सच ही है कि)
- त्वम् = तुम
- शिवम् = शिव को
- पतिम् = पति के रूप में
- इच्छसि? = चाहती हो?
- उपहसन् = उपहास करते हुए (मज़ाक उड़ाते हुए)
- नाम्ना = नाम से ही (वह)
- शिवः = शिव (कल्याणकारी) हैं,
- अन्यथा = वैसे तो (वास्तव में)
- अशिवः = अमंगलकारी (अकल्याणकारी) हैं।
- श्मशाने = श्मशान में
- वसति = रहते हैं।
- यस्य = जिनके
- त्रीणि = तीन
- नेत्राणि = नेत्र (आँखें) हैं,
- वसनम् = वस्त्र (कपड़े)
- व्याघ्रचर्म = बाघ की खाल है,
- अङ्गरागः = शरीर का लेप (उबटन)
- चिताभस्म = चिता की राख है,
- परिजनाश्च (परिजनाः + च): परिजनाः = मित्र/रिश्तेदार/साथी, च = और (और जिनके साथी)
- भूतगणाः = भूतों की टोली (भूत-प्रेत) हैं।
- किम् = क्या
- तमेव (तम् + एव): तम् = उसी, एव = ही (क्या उसी)
- शिवम् = शिव को
- पतिम् = पति के रूप में
- इच्छसि? = चाहती हो?
- क्रुद्धा = क्रोधित / गुस्सा
- सती = होती हुई
- अरे = ओ / अरे
- वाचाल! = बहुत बोलने वाले! (बड़बोले!)
- अपसर = दूर हट जाओ! / पीछे हटो!
- जगति = संसार में / दुनिया में
- न = नहीं
- कोऽपि (कः + अपि): कः = कोई, अपि = भी (कोई भी)
- शिवस्य = शिव के
- यथार्थम् = वास्तविक / सच्चे
- स्वरूपम् = रूप को
- जानाति = जानता है।
- यथा = जैसे (नीच)
- त्वमसि (त्वम् + असि): त्वम् = तुम, असि = हो (जैसे तुम खुद हो)
- तथैव (तथा + एव): वैसे ही / वैसा ही
- वदसि = बोल रहे हो।
- सखि! = हे सहेली!
- चल = चलो।
- यः = जो (व्यक्ति)
- निन्दा = बुराई / निंदा
- करोति = करता है,
- सः = वह
- तु = तो
- पापभाग् (पापभाक्): पाप का भागी (पापी)
- भवति = होता है
- एव = ही,
- यः = जो
- शृणोति = (निंदा) सुनता है,
- सोऽपि (सः + अपि): सः = वह, अपि = भी
- पापभाग् (पापभाक्): पाप का भागी
- भवति = होता है।
- पार्वती = पार्वती
- द्रुतगत्या = तेज़ गति से (तेज़ी से)
- निष्क्रामति = बाहर निकलती हैं / भागती हैं।
- तदैव (तदा + एव): तभी / उसी समय
- पृष्ठतः = पीछे से
- वटोः = ब्रह्मचारी के
- रूपम् = रूप को
- परित्यज्य = त्यागकर / छोड़कर
- शिवः = भगवान शिव
- तस्याः = उनका (पार्वती का)
- हस्तम् = हाथ
- गृह्णाति = पकड़ लेते हैं।
- पार्वती = पार्वती
- लज्जया = शर्म से (लज्जा से)
- कम्पते = काँपने लगती हैं।
- पार्वति! = हे पार्वती!
- प्रीतोऽस्मि (प्रीयतः + अस्मि): प्रीतः = प्रसन्न (खुश), अस्मि = हूँ (मैं प्रसन्न हूँ)
- तव = तुम्हारे
- सङ्कल्पेन = दृढ़ निश्चय से / संकल्प से।
- अद्यप्रभृति (अद्य + प्रभृति): अद्य = आज, प्रभृति = से लेकर (आज से लेकर / आज से ही)
- अहम् = मैं
- तव = तुम्हारे
- तपोभिः = तपों के द्वारा (तुम्हारी तपस्या से)
- क्रीतदासोऽस्मि (क्रीतदासः + अस्मि): क्रीतदासः = खरीदा हुआ गुलाम (दास), अस्मि = हूँ।
- विनतानना (विनत + आनना): नीचे झुके हुए मुख वाली (शर्माकर नीचे मुँह किए हुए)
- पार्वती = पार्वती
- विहसति = मुस्कुराती हैं।
👍👍👍
THE END

Nice notes
Thank you sir so helpful
Thank you
Bahut pharna parta hai
Dear sir
I wanted to thank u as my exams are coming and I wasn’t able to understand my sanskrit subject.
So thank u very much for helping me in my studies.
Regards
Your follower
Dear sir.
It’s really a great platform for the kids. I’ll remain highly indebted to you forever as me and my son completed whole Sanskrit with the help of maketoss.com
Regards