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Sanskrit Class 9- Chapter 8- जटायोः शौर्यम्- Hindi Translation & English Translation

Last Updated on 20/08/2026 by MakeToss

अष्टम: पाठः
Chapter 8-जटायोः शौर्यम्

जटायु की वीरता
Jatayu’s valor

प्रस्तुतोऽयं पाठ्यांशः महर्षिवाल्मीकिविरचितम् ” रामायणम्” इत्यस्य ग्रन्थस्य अरण्यकाण्डात् समुद्धृतोऽस्ति। अत्र जटायु- रावणयोः युद्धस्य वर्णनम् अस्ति। पक्षिराजजटायुः पञ्चवटीकानने विलपन्त्या: सीतायाः करुणक्रन्दनं श्रुत्वा तत्र गच्छति। सः सीतापहरणे निरतं रावणं तस्मात् निन्द्यकर्मणः निवृत्यर्थं प्रबोधयति । परञ्च अपरिवर्तितमति: रावणः तमेव अपसारयति। ततः पक्षिराज: तुण्डेन पादाभ्याञ्च प्रहरति, स्वनखै: रावणस्य गात्राणि विदारयति, एक्श्च बहुविधा- क्रमणेन रावणः भग्नधन्वा हतसारथिः हताश्वः व्रणी विरथश्च सञ्जात:। खगाधिपस्य पुनः पुन: अतिशयप्रहारैः व्रणी महाबली रावणः मूर्च्छितो भवति।

सरलार्थ यह प्रस्तुत पाठ्यांश महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित “रामायण” ग्रन्थ के अरण्य काण्ड से लिया गया है। यहाँ जटायु-रावण के युद्ध का वर्णन है। पक्षिराज जटायु पञ्चवटी जंगल में रोती हुई सीता के करुणक्रन्दन को सुनकर वहाँ जाता है। वह सीता अपहरण में लगा हुआ रावण को उससे नीच काम रोकने के लिए आगाह किया। अपने मति को बिना टाले रावण उसको ही (अपने) रास्ते से हटने को कहा। फिर पक्षिराज चोंच से और पंजों से प्रहार करता है, अपने नाखूनों से रावण के शरीर को फाड़ देता है। इस लड़ाई के क्रम के द्वारा रावण टूटे धनुष वाला, मरे हुए सारथी वाला, मरे हुए घोड़े वाला तथा रथविहीन और घायल हो जाता है। पक्षीराज के बार-बार बहिसाब प्रहार से महाबली रावण घायल और मूर्च्छित हो जाता है।

English Translation: This presented text has been taken from the Aranya Kand of the book “Ramayana” composed by Maharishi Valmiki. The following is a description of the war between Jatayu and Ravana. After having heard Sita’s crying, the bird’s King Jatayu travels to the ‘Panchavati’ forest. He warned Ravana, who was abducting Sita, to stop his heinous deed. On the contrary, Ravana asked Pakshiraj to move out of his way without pausing his thoughts. Pakshiraj then strikes with his beak and claw’s nails, tears the Ravan’s body. Through the sequence of this fight, Ravana gets injured as well as left with a broken bow, with a dead charioteer, with a dead horse, and without a chariot. Mahabali Ravana is injured and unconscious due to the repeated thump of Pakshiraj.

  • प्रस्तुतोऽयम् (प्रस्तुतः + अयम्): प्रस्तुत: = प्रस्तुत, अयम् = यह (यह प्रस्तुत)
  • पाठ्यांशः: पाठ का अंश / भाग
  • महर्षिवाल्मीकिविरचितम्: महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित (लिखे गए)
  • रामायणम्: रामायण
  • इत्यस्य: इस / इसके
  • ग्रन्थस्य: ग्रन्थ के
  • अरण्यकाण्डात्: अरण्यकाण्ड से (रामायण का एक भाग/अध्याय)
  • समुद्धृतोऽस्ति (समुद्धृतः + अस्ति): समुद्धृतः = लिया गया है / संकलित है, अस्ति = है
  • अत्र: यहाँ (इस पाठ में)
  • जटायु-रावणयोः: जटायु और रावण के
  • युद्धस्य: युद्ध का
  • वर्णनम्: वर्णन
  • अस्ति: है।
  • पक्षिराजजटायुः: पक्षियों के राजा जटायु
  • पञ्चवटीकानने: पंचवटी के जंगल में
  • विलपन्त्याः: विलाप करती हुई (रोती हुई)
  • सीतायाः: सीता के
  • करुणक्रन्दनम्: करुण क्रन्दन को (दुख भरी पुकार को)
  • श्रुत्वा: सुनकर
  • तत्र: वहाँ
  • गच्छति: जाते हैं।
  • सः: वह (जटायु)
  • सीतापहरणे (सीता + अपहरणे): सीता के अपहरण में
  • निरतम्: लगे हुए (लगे हुए को)
  • तस्मात्: उस
  • निन्द्यकर्मणः: निन्दनीय (बुरे) कार्य से
  • निवृत्यर्थम् (निवृत्ति + अर्थम्): रोकने के लिए / हटाने के लिए
  • प्रबोधयति: समझाते हैं।
  • परञ्च: परन्तु / लेकिन
  • अपरिवर्तितमतिः: जिसकी बुद्धि (मति) नहीं बदली (अपरिवर्तित रही) ऐसा
  • रावणः: रावण
  • तमेव (तम् + एव): उनको ही (जटायु को ही)
  • अपसारयति: दूर हटा देता है / झिड़क देता है।
  • ततः: इसके बाद / तब
  • पक्षिराजः: पक्षियों के राजा (जटायु)
  • तुण्डेन: चोंच से
  • पादाभ्याञ्च (पादाभ्याम् + च): पादाभ्याम् = दोनों पैरों से, च = और (और दोनों पैरों से)
  • प्रहरति: प्रहार करते हैं (हमला करते हैं)।
  • स्वनखैः: अपने नाखूनों से
  • रावणस्य: रावण के
  • गात्राणि: अंगों को / शरीर को
  • विदारयति: चीर देते हैं / घायल कर देते हैं।
  • एवञ्च (एवम् + च): और इस प्रकार
  • बहुविधाक्रमणेन (बहुविध + आक्रमणेन): अनेक प्रकार के आक्रमणों (वारों) से
  • रावणः: रावण
  • भग्नधन्वा: टूटे हुए धनुष वाला (जिसका धनुष टूट गया हो)
  • हतसारथिः: मारे गए सारथि वाला (जिसका रथ हांकने वाला मारा गया हो)
  • हताश्वः: मारे गए घोड़ों वाला (जिसके रथ के घोड़े मर गए हों)
  • व्रणी: घायल / ज़ख्मी
  • विरथश्च (विरथः + च): विरथः = रथ से विहीन (बिना रथ का), च = और (और बिना रथ का)
  • सञ्जात:ः हो गया।
  • खगाधिपस्य: पक्षियों के राजा (जटायु) के
  • पुनः पुनः: बार-बार
  • अतिशयप्रहारैः: अत्यधिक प्रहारों (वारों) से
  • व्रणी: घायल
  • महाबली: महाबलशाली
  • रावणः: रावण
  • मूर्च्छितो (मूर्च्छितः): बेहोश (मूर्च्छित)
  • भवति: हो जाता है।

सा तदा करुणा वाचो विलपन्ती सुदु:खिता।
वनस्पतिगतं गृध्रं ददर्शायतलोचना ॥1॥

अन्वय: – तदा सुदु:खिता करुणा: वाच: विलपन्ती आयतलोचना सा वनस्पतिगतं गृध्रं ददर्श

सरलार्थ: – तब बहुत दुःखी करुणामयी बाते बोलकर रोती हुई बड़ी नेत्रों वाली वह (सीता) पेड़ पर बैठे गिद्ध (जटायु) को देखी।

English Translation: Then Sita, with big eyes crying with very sad words of compassion, saw Jatayu, the vulture, sitting on the tree.

  • सा = वह (माता सीता)
  • तदा = तब / उस समय
  • करुणा = करुणाजनक / दया से भरी हुई
  • वाचो (वाचः) = वाणी / बातें (बोलती हुई)
  • विलपन्ती = विलाप करती हुई / रोती हुई
  • सुदु:खिता = अत्यधिक दुःखी
  • वनस्पतिगतं = वृक्ष (पेड़) पर बैठे हुए
  • गृध्रं = गिद्ध (जटायु) को
  • ददर्श = देखा
  • आयतलोचना = बड़ी-बड़ी आँखों वाली (सीता)

संधि विच्छेद

  • वाचो = वाचः (विसर्ग संधि)
  • ददर्शायतलोचना = ददर्श + आयतलोचना (दीर्घ स्वर संधि)

जटायो पश्य मामार्य ह्त्रियमाणामनाथवत्।
अनेन राक्षसेन्द्रेण करुणं पापकर्मणा ॥2॥

अन्वय: – हे आर्य जटाया! अनेन पापकर्मणा राक्षसेन्द्रेण अनाथवत् ह्त्रियमाणां मां करुणं पश्य

सरलार्थ: हे आर्य जटायु! इस पापी राक्षस राज के द्वारा अनाथ के जैसे हरण की जाती हुई मुझको देखो।

English Translation: O Arya Jatayu! , Look at me being kidnapped like an orphan by this sinful demon king.

  • जटायो = हे जटायु!
  • पश्य = देखो।
  • माम् (माम् + आर्य) = मुझको।
  • आर्य = हे श्रेष्ठ! / हे पूज्य!
  • ह्रियमाणाम् (ह्रियमाणम्) = हरी जाती हुई को / जबरदस्ती ले जाई जाती हुई को।
  • अनाथवत् = अनाथ की तरह (जिसका कोई रक्षक न हो)।
  • अनेन = इस।
  • राक्षसेन्द्रेण = राक्षसों के राजा (रावण) द्वारा।
  • करुणं = अत्यंत दयनीय रूप से / करुणाजनक स्थिति में।
  • पापकर्मणा = पापी / पाप कर्म करने वाले।

संधि विच्छेद

  • मामार्य = माम् + आर्य (व्यंजन संयोजन)

तं शब्दमवसुप्तस्तु जटायुरथ शुश्रुवे।
निरीक्ष्य रावणं क्षिप्रं वैदेहीं च ददर्श सः
॥3॥

अन्वय: – अथ सः अवसुप्त: जटायु: तु तं शब्दं शुश्रुवे रावणं निरीक्ष्य क्षिप्रं वैदेही ददर्श च

सरलार्थ: फिर वह सोया हुआ जटायु ने तो उनकी आवाज़ को सुना और रावण को देखकर जल्दी से सीता को देखा।

English Translation: Then the sleeping Jatayu heard her voice and seeing Ravana, he quickly saw Sita.

  • तम् = उस (सीता जी की)
  • शब्दम् = आवाज को / क्रंदन को
  • अवसुप्तः (अवसुप्तस्तु = अवसुप्तः + तु) = सोए हुए
  • तु = और / लेकिन
  • जटायुः (जटायुरथ = जटायुः + अथ) = जटायु ने
  • अथ = इसके बाद / तब
  • शुश्रुवे = सुना
  • निरीक्ष्य = देखकर (अच्छी तरह देखकर)
  • रावणम् = रावण को
  • क्षिप्रम् = शीघ्र ही / तुरंत
  • वैदेहीम् = वैदेही को (राजा विदेह की पुत्री सीता को)
  • = और
  • ददर्श = देखा
  • सः = उन्होंने (जटायु ने)

संधि विच्छेद

  • अवसुप्तस्तु = अवसुप्तः + तु (विसर्ग संधि)
  • जटायुरथ = जटायुः + अथ (विसर्ग संधि)

ततः पर्वतशृङ्गाभस्तीक्ष्णतुण्ड: खगोत्तमः।
वनस्पतिगत: श्रीमान्व्याजहार शुभां गिरम् ॥4॥

अन्वय: – ततः वनस्पतिगत: पर्वतशृङ्गाभ: तीक्ष्णतुण्ड: श्रीमान् खगोत्तमः शुभां गिरम् व्याजहार

सरलार्थ: तब पेड़ पर बैठे हुए पर्वत की चोटी जैसे ऊँचे नुकीले चोंच वाले पक्षी राज (रावण को) अच्छे वचन बोले।

English Translation: Then, sitting on a tree, the bird ‘Jatayu’ with a pointed beak like the top of a mountain spoke good words to Ravana.

  • ततः = उसके बाद / तब
  • पर्वतशृङ्गाभः (पर्वतशृङ्ग + आभः) = पर्वत की चोटी के समान विशाल शरीर वाले
  • तीक्ष्णतुण्डः = तीखी (तेज) चोंच वाले
  • खगोत्तमः = पक्षियों में श्रेष्ठ (जटायु)
  • वनस्पतिगतः = वृक्ष (पेड़) पर बैठे हुए
  • श्रीमान् (श्रीमान्व्याजहार = श्रीमान् + व्याजहार) = शोभायुक्त / कीर्तिमान
  • व्याजहार = बोले / कहा
  • शुभाम् = शुभ / कल्याणकारी
  • गिरम् = वाणी को / वचनों को

संधि विच्छेद

  • पर्वतशृङ्गाभः = पर्वतशृङ्ग + आभः (दीर्घ स्वर संधि)
  • श्रीमान्व्याजहार = श्रीमान् + व्याजहार (व्यंजन संधि)

निवर्तय मतिं नीचां परदाराभिमर्शनात्।
न तत्समाचरेद्धीरो यत्परोऽस्य विगर्हयेत्
॥5॥

अन्वय: – परदारभिमर्शनात् नीचां मतिं निवर्तय धीर: तत् न समाचरेत् यत् अस्य पर: विगर्हयेत्

सरलार्थ: दूसरे की पत्नी छूने से (मिलने वाली) नीच मनसूबे को रोको। शांतचित्त (पुरुष) वह (काम) नहीं करता है जिसकी दूसरे निंदा करें।

English Translation: Stop the lowly intentions you get from touching another’s wife. A self-possessed man does not do what others condemn.

  • निवर्तय = हटा लो / रोक लो।
  • मतिम् = बुद्धि को / विचार को।
  • नीचाम् = नीच / अधम / बुरी।
  • परदाराभिमर्शनात् = पराई स्त्री के स्पर्श से (पर + दारा + अभिमर्शनात् – पराई स्त्री को हाथ लगाने या हरण करने के पाप से)।
  • = नहीं।
  • तत् (तत्समाचरेद् = तत् + समाचरेत्) = वह आचरण / वैसा काम।
  • समाचरेत् = करना चाहिए।
  • धीरो (धीरः) = बुद्धिमान / धैर्यवान पुरुष को।
  • यत् = जिसकी / जो।
  • परोऽस्य (परः + अस्य) = दूसरा व्यक्ति (परः) / इसकी (अस्य)।
  • विगर्हयेत् = निंदा करे / बुराई करे।

संधि विच्छेद

  • तत्समाचरेद्धीरो = तत् + समाचरेत् + धीरः (व्यंजन और विसर्ग संधि)
  • परोऽस्य = परः + अस्य (विसर्ग उत्व संधि – अवग्रह रूप)

वृद्धोऽहं त्वं युवा धन्वी सरथ: कवची शरी।
न चाप्यादाय कुशली वैदेहीं मे गमिष्यसि
॥6॥

अन्वय: – अहं वृद्ध: त्वं (तु) युवा, कवची, सरथ: धन्वी शरी अपि च मे वैदेहीं आदाय कुशली न गमिष्यसि

सरलार्थ: मैं बूढ़ा (हूँ) तुम जवान (तो) हो, धनुर्धर (हो), कवच धारण किये हुए (हो) तथा रथ के साथ बाण भी लिए हुए मेरी सीता (माता) को लेकर कुशलता पूर्वक नहीं जाओगे।

English Translation: You are young, an archer, dressed in armour, and carrying arrows alongside the chariot. Despite the fact that I am old, yet you will not go along with my mother ‘Sita’ efficiently.

  • वृद्धः (वृद्धोऽहं = वृद्धः + अहम्) = बूढ़ा हूँ।
  • अहम् = मैं।
  • त्वम् = तुम।
  • युवा = जवान (युवक) हो।
  • धन्वी = धनुषधारी हो (धनुष से युक्त हो)।
  • सरथः = रथ सहित हो (तुम्हारे पास रथ है)।
  • कवची = कवच धारण किए हुए हो।
  • शरी = बाणों से युक्त हो।
  • = नहीं।
  • = और।
  • अपि (चाप्यादाय = च + अपि + आदाय) = भी।
  • आदाय = लेकर (सीता जी को साथ लेकर)।
  • कुशली = कुशलतापूर्वक / सुरक्षित रूप से।
  • वैदेहीम् = वैदेही (सीता जी) को।
  • मे = मेरे (रहते हुए / मेरे सामने से)।
  • गमिष्यसि = जा सकोगे।

संधि विच्छेद

  • वृद्धोऽहं = वृद्धः + अहम् (विसर्ग उत्व संधि – अवग्रह रूप)
  • चाप्यादाय = च + अपि + आदाय (च + अपि = चापि [दीर्घ संधि], चापि + आदाय = चाप्यादाय [यण् संधि])

तस्य तीक्ष्णनखाभ्यां तु चरणाभ्यां महाबल:।
चकार बहुधा गात्रे व्रणान्पतगसत्तमः
॥7॥

अन्वय: – महाबल: पतगसत्तमः तु तीक्ष्णनखाभ्यां चरणाभ्यां तस्य गात्रे बहुधा व्रणान् चकार

सरलार्थ: महाबली पक्षी राज ने तो तीव्र नाख़ूनों वाले पंजो से उसके देह पर अनेक घाव कर दिए।

English Translation: Mahabali Pakshiraj inflicted many wounds on his body with the claws of sharp nails.

  • तस्य = उसके (रावण के)
  • तीक्ष्णनखाभ्याम् = तीखे नाखूनों वाले
  • तु = और / तो
  • चरणाभ्याम् = दोनों पैरों से
  • महाबलः = महान बलशाली (जटायु)
  • चकार = कर दिए / बना दिए
  • बहुधा = बहुत सारे / अनेक प्रकार के
  • गात्रे = शरीर पर (रावण के अंगों पर)
  • व्रणान् = घाव (जख्म)
  • पतगसत्तमः = पक्षियों में श्रेष्ठ (जटायु)

संधि विच्छेद

  • व्रणान्पतगसत्तमः = व्रणान् + पतगसत्तमः (व्यंजन संयोजन)

तो ऽस्य सशरं चापं मुक्तामणिविभूषितम् ।
चरणाभ्यां महातेजा बभञ्जास्य महाद्धनु: ॥8॥

अन्वय: – तत: महातेजा: महाद्धनु: अस्य मुक्तामणिविभूषितम् सशरं चापं चरणाभ्यां बभञ्च

सरलार्थ: तब महातेजस्वी (जटायु), इसके (रावण के) मोती-मणियों से सज्जित बाण के साथ बड़े चाप (arc) वाले धनुष को (भी) पंजों से तोड़ दिए

English Translation: The majestic Jatayu then broke the large arched bow with his claws, along with the arrows adorned with pearls and pearls of Ravana.

  • ततो (ततः) = उसके बाद / तब
  • अस्य (तोऽस्य = ततः + अस्य) = इस (रावण) का
  • सशरम् = बाणों सहित (स + शरम्)
  • चापम् = धनुष को
  • मुक्तामणिविभूषितम् = मोतियों और मणियों से सुसज्जित (सजे हुए)
  • चरणाभ्याम् = दोनों पैरों से
  • महातेजाः = महान तेजस्वी (जटायु)
  • बभञ्ज = तोड़ दिया
  • अस्य = उसके (रावण के)
  • महद्धनुः (महाद्धनुः = महद् + धनुः) = विशाल धनुष को

संधि विच्छेद

  • तोऽस्य = ततः + अस्य (विसर्ग उत्व संधि – अवग्रह रूप)
  • महाद्धनुः = महद् + धनुः (व्यंजन संधि) – पाठ्यपुस्तकों में इसे ‘महद्धनुः’ या ‘महाद्धनुः’ रूप में लिखा जाता है।

स भग्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथि: ।
तलेनाभिजघानाशु जटायुं क्रोधमूर्च्छितः
॥9॥

अन्वय: – स: भग्नधन्वा हताश्व: हतसारथि: विरथ: क्रोधमूर्च्छितः आशु तलेन जटायुं अभिजघान।

सरलार्थ: वह टूटे हुए धनुष वाला, मारे गए घोड़ों वाला, मरे हुए सारथि वाला, बिना रथ के क्रोध से भरा हुआ तुरंत थप्पड़ से जटायु को मारा।

English Translation: With a broken bow, slain horses, a dead charioteer, and no chariot, he slapped Jatayu in rage.

  • सः (स) = वह (रावण)
  • भग्नधन्वा = टूटे हुए धनुष वाला (जिसका धनुष टूट चुका था)
  • विरथः = रथ से विहीन (रथहीन हुआ)
  • हताश्वः = मरे हुए घोड़ों वाला (जिसके घोड़े मार दिए गए थे)
  • हतसारथिः = मरे हुए सारथि वाला (जिसका सारथि मारा जा चुका था)
  • तलेन (तलेनाभिजघान = तलेन + अभिजघान) = हथेली से / थप्पड़ से
  • अभिजघान = प्रहार किया / मारा
  • आशु = शीघ्र ही / तुरंत
  • जटायुम् = जटायु को / जटायु पर
  • क्रोधमूर्च्छितः = क्रोध से व्याकुल / गुस्से में अंधा होकर

संधि विच्छेद

  • तलेनाभिजघानाशु = तलेन + अभिजघान + आशु (दीर्घ स्वर संधि)

जटायुस्तमतिक्रम्य तुण्डेनास्य खगाधिपः।
वामबाहून्दश तदा व्यपाहरदरिन्दमः
॥9॥

अन्वय: – अरिन्दमः खगाधिपः जटायु: तम् अतिक्रम्य अस्य दश वामबाहून् तुण्डेन व्यपाहरत्।

सरलार्थ: दुश्मनों को हारने वाले पक्षियों के राजा जटायु ने उस प्रहार को बचाकर, इसके (रावण के) दश बाई बाँहों को चोंच के द्वारा उखाड़ दिया।

English Translation: Jatayu, the king of birds who defeated the enemies, escaped that blow, uprooted Ravana’s ten left arms with his beak.

  • जटायुः (जटायुस्तमतिक्रम्य = जटायुः + तम् + अतिक्रम्य) = जटायु ने
  • तम् = उस (रावण के प्रहार) को
  • अतिक्रम्य = बचाकर / हटाकर (वार को टालकर)
  • तुण्डेन (तुण्डेनास्य = तुण्डेन + अस्य) = चोंच से
  • अस्य = इसकी (रावण की)
  • खगाधिपः = पक्षियों के राजा (जटायु)
  • वामबाहून् = बाईं भुजाओं (बाँहों) को
  • दश = दस (१०)
  • तदा = तब / उस समय
  • व्यपाहरत् (व्यपाहरदरिन्दमः = व्यपाहरत् + अरिन्दमः) = उखाड़ दिया / काट डाला
  • अरिन्दमः = शत्रुओं का दमन करने वाले (जटायु)

संधि विच्छेद

  • जटायुस्तमतिक्रम्य = जटायुः + तम् + अतिक्रम्य (विसर्ग सत्व संधि और व्यंजन संयोजन)
  • तुण्डेनास्य = तुण्डेन + अस्य (दीर्घ स्वर संधि)
  • व्यपाहरदरिन्दमः = व्यपाहरत् + अरिन्दमः (व्यंजन जश्त्व संधि)

👍👍👍

31 thoughts on “Sanskrit Class 9- Chapter 8- जटायोः शौर्यम्- Hindi Translation & English Translation”

  1. I really like it it is very helful for me I can easily see the hindi and english translation of sanskrit slok thanks A lot 😊😊😊

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  2. Please send an English translation for above… It would be really good if word to word meaning is also given… Though it would be a tedious work on your side .. it would be helpful for students… thank you for your efforts… Kindly take into consideration the above suggestions too…. thank you..

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